Bhartiya Vivah || सात फेरे सात वचन

ghanshyam kumawat
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Bhartiya Vivah || सात फेरे सात वचन

Bhartiya Vivah || सात फेरे सात वचन

भारतीय विवाह संस्कृति में एक महत्त्वपूर्ण और प्राचीन भूमिका निभाता है। विवाह हिन्दू संस्कृति में एक पवित्र और अनमोल संस्कार है, जिसमें दो अन्योन्य का साथी बनकर जीवन बिताने का वादा किया जाता है। यह संस्कृति दो परिवारों को एकत्र करती है और उन्हें एक साथ बंधती है। इसके साथ ही, विवाह हिन्दू धर्म में एक संस्कार है जो परम्परा, समाज, और धार्मिक मूल्यों को महत्त्व देता है।

Bhartiya Vivah || सात फेरे सात वचन
Bhartiya Vivah || सात फेरे सात वचन

विवाह का अर्थ और संस्कार: Bhartiya Vivah

विवाह हिन्दू संस्कृति में एक अनूठा प्रतीक है, जो पति और पत्नी के बीच आत्मिक और मानसिक जुड़ाव को दर्शाता है। इसमें सात फेरे या सप्तपदी का विशेष महत्त्व है, जो एक नए जीवन के साझेदारी की शुरुआत को दर्शाते हैं। यह रस्म विवाह की स्थिरता को और भी मजबूती से निभाती है।

सप्तपदी का महत्त्व: Bhartiya Vivah

सप्तपदी या सात फेरे ही नहीं, बल्कि हिन्दू धर्म में 7 को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। संख्या 7 को जीवन के विभिन्न पहलुओं को संकेतित करने के लिए माना जाता है। सप्तपदी में हर फेरे का एक विशेष अर्थ होता है, जो विवाहित जोड़े के लिए महत्त्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: Bhartiya Vivah

इस संस्कृति के अंतर्गत, सात फेरों या सप्तपदी का महत्त्व बहुत गहरा है। यह एक ऐसा प्रतीक है जो जोड़े के बीच गहरा बंधन बनाता है और एक नए जीवन की शुरुआत में दोनों को संगीत समान बनाता है।

सप्तपदी का संदेश: Bhartiya Vivah

सप्तपदी विवाह के साथ विवाहित जोड़े के बीच विशेष प्रतिज्ञा और संबंध को दर्शाता है। हर फेरे में दोनों पति और पत्नी एक-दूसरे के साथ एक नए कदम की ओर बढ़ते हैं और विचारों, भावनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को साझा करते हैं।

सात फेरों की महत्ता: Bhartiya Vivah

सात फेरों में हर फेरे का अलग महत्त्व होता है जो जोड़े के संबंधों को समृद्धि, स्थिरता, और सम्मान के साथ बाँधता है। यह संस्कार जोड़े के बीच एक नयी शुरुआत की दिशा में उन्हें प्रेरित करता है।

समाप्ति:

इस रीति-रिवाज के माध्यम से, सप्तपदी या सात फेरे विवाहित जोड़े के बीच गहरा बंधन बनाते हैं। यह संस्कृति और रीति-रिवाज न केवल एक नए जीवन की शुरुआत को प्रेरित करते हैं, बल्कि दो जीवनों को साझा संघर्ष, समृद्धि और खुशियों के साथ जीने की प्रतिज्ञा करते हैं।

ध्यान देने योग्य:

यह सम्मानित किया जाता है कि सात की संख्या हमारे जीवन में विशेषता और समृद्धि का प्रतीक होती है। सप्तपदी इसी दृष्टिकोण से नहीं केवल एक नए जीवन की शुरुआत को दर्शाती है, बल्कि दोनों जीवन साथी के बीच साझा दुःख, सुख, संघर्ष और सहयोग की प्रतिज्ञा करती है।

इस तरह, सात फेरों का संस्कार एक नए जीवन के लिए एक महत्त्वपूर्ण रीति-रिवाज है जो प्रेम, समर्पण, और विश्वास के साथ दो जीवनों को एक साथ बाँधता है। इसमें सम्मान, समृद्धि, और साझा जीवन की प्रतिज्ञा होती है जो एक सुखमय और समृद्ध जीवन की दिशा में उन्हें अग्रसर करती है।

सात फेरे सात वचन

विवाह में सात वचनों का महत्त्व बहुत अधिक होता है। ये वचन विवाह समारोह के दौरान लिए जाते हैं और हर एक वचन जोड़ी के बीच सात वचनों के माध्यम से दोनों के बीच साझेदारी और समर्पण का एक महत्त्वपूर्ण प्रतीक होता है। यहां सातों वचनों के बारे में अधिक जानकारी है:

पहला वचन (साझेदारी और समझौता)

पहला वचन होता है साझेदारी का वचन। यह वचन मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एक दूसरे का समर्थन करने का संकेत देता है।

दूसरा वचन (शक्ति)

यह वचन जीवन में मजबूती का निर्माण करने के बारे में होता है। यह संकेत करता है कि अच्छे और बुरे समय में एक दूसरे का समर्थन करने का वादा किया गया है।

तीसरा वचन (समृद्धि)

यह वचन परिवार के समृद्धि के बारे में होता है। यह वचन परिवार के कल्याण के लिए वादा करता है और परिवार की आर्थिक स्थिति के लिए जिम्मेदारी लेने का संकेत करता है।

चौथा वचन (परिवार)

चौथा वचन होता है दोनों परिवारों के सम्मान और प्यार का वचन। यह वचन दोनों परिवारों की परंपराओं और मूल्यों का समर्थन करने का वादा करता है।

पांचवा वचन (वंशजन)

यह वचन बच्चों के हित और उनके पालन-पोषण के बारे में होता है। यह वचन स्वस्थ और जिम्मेदार बच्चों को पालने का वादा करता है।

छठा वचन (स्वास्थ्य)

यह वचन दोनों के स्वास्थ्य और कल्याण का वचन करता है। यह वचन स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जीने का वादा करता है।

सातवां वचन (शाश्वत बंधन)

आखिरी वचन होता है शाश्वत सख्ती, वफादारी और सहायकता का वचन। यह वचन दोनों का अनंत संबंध और सहयोग का प्रतीक होता है।

हर एक वचन ब्राह्मणों द्वारा बोले जाने वाले मंत्रों के साथ लिया जाता है और यह वचन दोनों पति-पत्नी के बीच एक पवित्र बंधन का प्रतीक होता है जो उन्हें सदा सुखी और मधुर जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन करता है।

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