Delhi Untold History || दिल्ली के पुराने नाम का इतिहास ?

ghanshyam kumawat
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Delhi untold history : महाभारत काल से दिल्ली का सम्बन्ध 

 

 

दिल्ली का वर्णन भारतीय महाकाव्य महाभारत के काल मे मिलता है। दिल्ली  महाभारत के प्राचीन राज्य इंद्रप्रस्थ की राजधानी के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि 19वीं शताब्दी के आरंभ तक दिल्ली इंद्रप्रस्थ नामक गांव हुआ करता था।

दिल्ली में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई किए जाने पर उस अवशेष प्राप्त हुए हैं जो महाभारत काल के समय से संबंधित हैं। परंतु अभी तक उस समय की जनसंख्या का कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। कुछ इतिहास का इंद्रप्रस्थ दिल्ली के पुराने किले के आसपास बताते हैं। दिल्ली के बारे में यह भी कहा जाता है यह शहर 7 बार उजड़ा सात बार बताया गया था।
चंद्रवरदाई की रचना पृथ्वीराज रासो में तोमर वंश राजा आनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है।

दिल्ली और महाभारत युग  Delhi untold history 

पुराणों में दिल्ली का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है। कहा जाता है कि दिल्ली इंद्रप्रस्थ राज्य के रूप में जानी जाती थी। महाभारत काल में दिल्ली पांडवों की प्रिय नगरी इंद्रप्रस्थ हुआ करती थी।

पांडवों ने अपने पूर्वजों की राज्य खांडव वन को अपनी कड़ी मेहनत से तथा भगवान श्री कृष्ण की सहायता से पुनः एक भव्य नगर के रूप में बसाया था जिसे इंद्रप्रस्थ कहा जाता है।

दिल्ली उसी इंद्रप्रस्थ का एक हिस्सा है। इंद्रप्रस्थराज्य के अवशेष आज भी भारतीय पुरातत्व विभाग पुरानी दिल्ली के खंडहरो में प्राप्त हो रहे हैं। जो यह संकेत करते हैं कि दिल्ली का संबंध महाभारत काल की इंद्रप्रस्थ नगरी से हैं।

जैसे-जैसे समय बीत गया वैसे वैसे महाभारत युग भी चला गया और इंद्रप्रस्थ धीरे धीरे जमी दोस्त होता गया। समय के साथ साथ नए नए शासकों ने इसी स्थान पर अपना राज्य का निर्माण करवाएं इंद्रप्रस्थ के अवशेष धीरे धीरे जमीन के अंदर धस्ते गए। और वही अवशेष आज खुदाई में पुरानी दिल्ली के खंडहरों से प्राप्त हो रहे हैं।

Delhi बनने के पहले के सात शहर Delhi untold history 

ब्रिटिश शासन से पूर्व ऐसा माना जाता है कि दिल्ली सात बार उजड़ी तथा सात बार बसी है जिनकी कुछ अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं।
1    लाल कोट, सीरी का किला किला राय पिथौरा  :  तोमर वंश के सबसे प्राचीन किले लाल कोट के समीप कुतुबुद्दीन  ऐबक द्वारा बनाया गया।

2    सीरी का किला                                   :  इस शहर का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 1303 ईस्वी  में  किया गया।
3    तुगलकाबाद                                      :  इस शहर का निर्माण ज्ञासुद्दीन तुगलक द्वारा सन 1321 से  1325 तक करवाया गया था।
4    जहांपनाह किला                                 :  इस किले का निर्माण मोहम्मद बिन तुगलक द्वारा सन 1325  1351 निर्मित किया गया।
5    कोटला फिरोज़ शाह                             :   इस शहर का निर्माण फिरोजशाह तुगलक द्वारा 1351  1388  द्वारा करवाया गया था।
6    पुराना किला                                      :  इस शहर को शेरशाह सूरी और हिमायू द्वारा 1538 1545 में  बसाया गया था। यह शहर ठीक उसी स्थान पर हैं जहां   पर पौराणिक इंद्रप्रस्थ होने के प्रमाण मिले हैं।
7    शाहजहानाबाद                                    :  इस शहर को शाहजहां द्वारा सन 1638 1649 मैं बसाया  गया  था , इसी में लाल किला और चांदनी चौक शामिल है।

शाहजहाँ ने दिल्ली को किस नाम से बसाया ? : Delhi untold history

17 वी सदी के मध्य में मुगल सम्राट शाहजहां ने सातवीं बार दिल्ली शहर को बसाया जिसे शाहजहानाबाद के नाम से भी पुकारा जाता है। इस शहर की अवशेष आज भी पुरानी दिल्ली के रूप में सुरक्षित हैं। तभी से दिल्ली मुगल शासकों की राजधानी रही।

शाहजहां के बाद की दिल्ली 

कुछ समय पश्चात मुगल शासन के पतन हो जाने के बाद ब्रिटिश शासकों द्वारा दिल्ली को अपने अधिकार में ले लिया गया। प्रारंभ में उन्होंने पूरे भारत को अपने अधीन कर लिया और कलकत्ता को अपनी राजधानी के रूप में घोषित किया।

कुछ समय अंतराल द्वारा 1911 में ब्रिटिश शासक ने कोलकाता को अपनी राजधानी हटाकर दिल्ली को अपनी राजधानी घोषित कर दिया। उसके पश्चात ब्रिटिश शासन दिल्ली पर लंबे समय अंतराल पर आ और इसी अंतराल में देखो महानगर के रूप में विकसित करने के लिए पुराने दिल्ली के कुछ भागों को हटा दिया गया था।

ब्रिटिश काल

दिल्ली पर मुगल शासन का धीरे धीरे पतन होने लगा। दिल्ली पर आखिरी मुगल शासन बहादुर शाह जफर ने किया था। सन 1857 में ब्रिटिश काल शुरू हुआ उन्होंने दिल्ली पर अपनी हुकूमत का झंडा गाढ़ा और साथ ही संपूर्ण भारत को अपने कब्जे में ले लिया।

ब्रिटिश शासक ने स्वर प्रथम कलकत्ता को अपनी राजधानी के रूप में घोषित किया परंतु कुछ समय अंतराल बाद सन 1911 में दिल्ली को अपनी राजधानी के रूप में घोषित किया।  धीरे धीरे दिल्ली को एक महानगर के रूप में विकसित करने लगे।

इसी विकास में ब्रिटिश शासन ने दिल्ली के पुराने भाग को ध्वस्त करना शुरू कर दिया जिससे दिल्ली का पुराना किला खंडित हो चुका है।

इस दौरान नई दिल्ली क्षेत्र का विस्तार हुआ। सन 1947 में भारत की आजादी के बाद ब्रिटिश शासन खत्म हुआ दिल्ली को आधिकारिक रूप से भारत की राजधानी के रूप में घोषित कर दिया गया।

स्वतंत्र भारत के बाद दिल्ली Delhi story

सन 1947 में भारत देश ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ तथा साथ ही दिल्ली को आधिकारिक रूप से भारत की राजधानी के रूप में घोषित किया गया। भारत की स्वतंत्रता के साथ ही दिल्ली को एक नई पहचान प्राप्त हुई।

दिल्ली स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा शहर बना। राजधानी होने के नाते दिल्ली को विकास की दृष्टि से सबसे प्रथम दर्जा प्राप्त हुआ। और जैसे-जैसे समय निकलता गया वैसे वैसे दिल्ली को नई पहचान के साथ-साथ एक बड़े महानगर और विकसित प्रांत की उपाधि प्राप्त हुई।

FACT ABOUT Delhi

दिल्ली का नामकरण किसने किया था?

Delhi  के नामकरण के बारे में इतिहासकारों ने कहा है कि तोमर वंश के राजा धव ने इस इलाके का नाम ढिली रखा था क्योंकि दिल्ली के अंदर लोहे का ढिला था। बाद में इस इलाके का नाम ध्यान ही रख दिया गया था।

दिल्ली का पहला राजा कौन था?

चंदबरदाई की रचना पृथ्वीराज रासो के अनुसार तोमर वंश के राजा अनंगपाल को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है और वही दिल्ली का पहला राजा था।

Delhi का पुराना नाम क्या था? Dehli untold history 

दिल्ली का पुराना नाम इंद्रप्रस्थ था।

Delhi का अंतिम राजा कौन था?

दिल्ली का अंतिम शासक बहादुर शाह जफर को कहा जाता है।

 

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