Tonk History in hindi

ghanshyam kumawat
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Tonk || ‘मीठे खरबूजे का चमन’

टोंक एक ऐतिहासिक शहर है जो राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए एक जीवंत उदाहरण है। यहां के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन स्मारकों और जनजातीय परंपराओं ने इसे पर्यटकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है। चलिए इस शहर की गहरी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझते हैं।

Contents
Tonk || ‘मीठे खरबूजे का चमन’अनूठी भौगोलिक स्थितिजनसांख्यिकी और लोक बोलियांTonk के प्रमुख आकर्षणबीसलपुर बांधसुनहरी हवेलीबीसलदेव मंदिरऐतिहासिक धरोहर का खजानाकल्याण जी मंदिरदेवनारायण मंदिरटोडा रायसिंह नगरलोकदेवता पीपाजी की गुफामंडकला गांवप्रमुख उद्योग और व्यापारसंपर्क और सड़क मार्गखेती और सिंचाईपर्यटन के गलियारे Tonk visiting placesक्लॉक टावररसिया की टेकरीहाथी भाटाहादी रानी का कुंडधार्मिक आस्था के केंद्रजामा मस्जिदअन्नपूर्णा गणेश मंदिरटोंक की अन्य विशेषताएंअरबी-फारसी अनुसंधान संस्थानटोंक का खान-पान और व्यंजन Tonk best foodकरी भाजीलाल मासमिर्ची वड़ाप्याज की चटनीमावा बाटीटोंक के त्योहार और मेले Tonk festival & fairदेवनारायण मेलाबीसलपुर बांध मेलाटोंक की हस्तशिल्प और कारीगरीस्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएंजलवायु और पारिस्थितिकी

Tonk History in hindi

टोंक का प्राचीन नाम ‘टाटानगर’ या ‘स्वादलक्ष्य’ था। इस शहर को ‘लखनऊ’, ‘आदम का गुलशन’, ‘मीठे खरबूजे का चमन’ और ‘हिंदू-मुस्लिम एकता का मुखौटा’ जैसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है। यह राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 7,194 वर्ग किलोमीटर है। इसकी अनन्य भौगोलिक स्थिति और जनजातीय विविधता इसकी पहचान बनाती है।

अनूठी भौगोलिक स्थिति

टोंक का अवस्थान अन्य शहरों से उसे अलग करता है। यह राजधानी जयपुर से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण में, उदयपुर से करीब 325 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 375 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महाभारत काल से जुड़ा यह शहर उस समय ‘सफेदलक्षणम्’ और ‘रेड’ के नाम से जाना जाता था।

जनसांख्यिकी और लोक बोलियां

2011 की जनगणना के अनुसार, टोंक की कुल आबादी 14,21,326 है, जिससे यह राज्य का 23वां सबसे अधिक आबादी वाला जिला बन गया है। Tonk में 84 से अधिक लोक बोलियां बोली जाती हैं, जिनमें दाढ़ी, जयपुरी और झाड़शाही प्रमुख हैं। यह भाषाई विविधता इस शहर की समृद्ध जनजातीय विरासत को दर्शाती है।

Tonk के प्रमुख आकर्षण

बीसलपुर बांध

टोंक का बीसलपुर बांध इसकी शान है। इस बांध की अद्भुत कंक्रीट कला विश्व प्रसिद्ध है। यह बांध जयपुर और अजमेर जैसे बड़े शहरों को पानी की आपूर्ति करता है। जब इस बांध के 18 द्वार खुलते हैं तो इसका दृश्य मनमोहक हो जाता है और प्रत्येक व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो जाता है। साथ ही, यह बांध राज्य का एक महत्वपूर्ण जलाशय भी है, जहां आप रंगीन मछलियों को देख सकते हैं।

सुनहरी हवेली

सुनहरी हवेली एक प्राचीन महल परिसर के भीतर स्थित है। इसकी दीवारें और छत बेल्जियम से आए शीशे की खिड़कियों से जड़ी हैं, जिनसे प्रकाश आता है। यहां का अद्भुत तांबे का कारीगरी काम और गिल्डेड आर्किटेक्चरल ग्लास वर्क बेजोड़ है। संपूर्ण प्रभाव तांबे के आभूषणों के उत्कृष्ट टुकड़ों का है।

बीसलदेव मंदिर

बीसलदेव मंदिर, जिसे विशालदेवी जी का मंदिर भी कहा जाता है, बनास नदी के किनारे बीसलपुर बांध के पास स्थित है। यह भगवान शिव के अवतार गोकर्णेश्वर को समर्पित है और राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। इस मंदिर की बेमिसाल वास्तुकला और सुंदर नक्काशी देखने लायक है।

ऐतिहासिक धरोहर का खजाना

Tonk के इतिहास को इसके प्राचीन मंदिरों, स्मारकों और गुफाओं से समझा जा सकता है।

कल्याण जी मंदिर

श्री कल्याण जी मंदिर, जिसे डिग्गी कल्याण जी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, मालपुरा तहसील में स्थित है। यहां भगवान विष्णु की एक सुंदर प्रतिमा है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की दीवारों और छत पर नक्काशी और पेंटिंग देखने लायक है।

देवनारायण मंदिर

देवनारायण मंदिर लोकदेवता देवनारायण को समर्पित है, जिनकी पूजा विष्णु के अवतार के रूप में की जाती है। यहां साल में दो बार बड़ा मेला लगता है और शुक्रवार को श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं।

टोडा रायसिंह नगर

टोडारायसिंहनगर टोंक का ऐतिहासिक नगर है, जहां कई सुंदर स्मारक हैं। यहां की हादी रानी बावड़ी पर फिल्म ‘पहेली’ की शूटिंग की गई थी। इस अनूठी बावड़ी की विशेषता है कि जिस सीढ़ी से अंदर जाते हैं, उसी से बाहर नहीं आ सकते। इसे हादी रानी की बावड़ी और ख्वाजा की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

लोकदेवता पीपाजी की गुफा

लोकदेवता पीपाजी की गुफा भी टोडारायसिंहनगर में ही स्थित है। यह पारंपरिक लोक कथाओं और आस्थाओं के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है।

मंडकला गांव

मंडकला गांव को Tonk का ‘मिनी पुष्कर‘ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां ऋषि मांडव की तपोभूमि थी। इस गांव में कई प्राचीन मंदिर और तालाब हैं जिनकी वास्तुकला अद्भुत है।

प्रमुख उद्योग और व्यापार

टोंक में कपास, बीड़ी, सरसों और नमदा उत्पादन के प्रमुख उद्योग हैं। शहर के पास खतौली विद्युत प्लांट स्थित है, जहां सरसों के नष्ट होने वाले भाग से बिजली का उत्पादन किया जाता है। यह प्लांट आसपास के क्षेत्रों को रोजगार भी प्रदान करता है। साथ ही, टोंक में चमड़े और नमदा गलीचों के उत्पादन का भी एक बड़ा उद्योग है।

संपर्क और सड़क मार्ग

टोंक का रजिस्ट्रेशन कोड RJ 26 है। इसके मध्य से एक राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरता है, जो इसे भोपाल और जयपुर से जोड़ता है। इस शहर की अच्छी सड़क सुविधा के कारण यहां आवागमन आसान हो जाता है।

खेती और सिंचाई

टोंक की खेती मुख्य रूप से बारिश और बीसलपुर बांध पर निर्भर है। यहां ज्वार, गेहूं, मक्का, कपास, चना और तिलहन की खेती की जाती है।

पर्यटन के गलियारे Tonk visiting places

क्लॉक टावर

क्लॉक टावर या घंटाघर Tonk का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह 1937 में नवाब मोहम्मद शहादत अली खान द्वारा निर्मित तीन मंजिला इमारत है। इसमें चारों दिशाओं में विशाल घड़ियां लगी हुई हैं, जो पुराने समय में तेज आवाज करती थीं।

रसिया की टेकरी

रसिया की टेकरी टोंक की एक ऊंची पहाड़ी है, जहां से पूरे शहर का मनमोहक दृश्य देखा जा सकता है। ट्रेकिंग और बरसात के मौसम में यहां आना पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन अनुभव होता है।

हाथी भाटा

हाथी भाटा ककोड़ कस्बे में स्थित है और भारत के सुंदरतम स्मारकों में से एक है। यहां पत्थर पर बनी मूर्तियां पर्यटकों को अपनी अद्भुत कारीगरी से मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

हादी रानी का कुंड

हादी रानी का कुंड टोडारायसिंह के पास स्थित है। इस सुंदर बावड़ी में दोहरी सीढ़ियां हैं, जिनसे नीचे जाने और ऊपर आने के लिए अलग-अलग रास्ते हैं। यह अमर प्रेम की निशानी मानी जाती है।

धार्मिक आस्था के केंद्र

टोंक में कई प्रसिद्ध मंदिर और मस्जिदें हैं जो इसकी धार्मिक विरासत को दर्शाती हैं।

जामा मस्जिद

जामा मस्जिद एक प्राचीन मस्जिद है, जिसका निर्माण 1246 में डोंग जिले के पहले नवाब अमीर खान ने करवाया था। इसकी दीवारों पर सुंदर पेंटिंग और मीनाकारी देखने को मिलती है। यह राजस्थान की सबसे सुंदर मस्जिदों में से एक है।

अन्नपूर्णा गणेश मंदिर

अन्नपूर्णा गणेश मंदिर मेवाड़ शासन काल का प्राचीन मंदिर है, जिसे लोग ‘सूली का मंदिर’ भी कहते हैं। इसका इतिहास बहुत रोचक है और यह करीब 10-12 शताब्दी पुराना माना जाता है।

टोंक की अन्य विशेषताएं

अरबी-फारसी अनुसंधान संस्थान

टोंक में अरबी-फारसी अनुसंधान संस्थान भी स्थित है, जो अरबी और फारसी अध्ययनों के प्रचार और संरक्षण में लगा हुआ है। यहां कुछ महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पांडुलिपियां भी प्रदर्शित की जाती हैं।

टोंक का खान-पान और व्यंजन Tonk best food

Tonk अपने स्वादिष्ट और पौष्टिक खान-पान के लिए भी जाना जाता है। यहां की लाल रंग की खरबूजे अपनी मिठास और खनिज अमलों से भरपूर होने के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। टोंक में मिलने वाले कुछ लोकप्रिय और स्वादिष्ट व्यंजन हैं:

करी भाजी

यह टोंक की विशिष्ट सब्जी है जिसमें आलू, गाजर और प्याज को गर्म मसालों और घी में उबालकर तैयार किया जाता है। इसका स्वाद बेहद लजीज और गरमागरम होता है।

लाल मास

यह Tonk का प्रमुख मांसाहारी व्यंजन है। इसमें बकरी या भेड़ के मांस को तेज मसालों और लाल मिर्च के साथ पकाया जाता है। इसका स्वाद नमकीन और तीखा होता है।

मिर्ची वड़ा

टोंक की लाल मिर्च इस नाश्ते के लिए बहुत मशहूर है। इसमें लाल मिर्च को आटे से मिलाकर तले जाते हैं और चटनी के साथ परोसा जाता है।

प्याज की चटनी

यह टोंक की विशिष्ट चटनी है जिसे प्याज, अदरक, लहसुन और तेज मसालों से बनाया जाता है। इसका स्वाद नमकीन और गरमागरम होता है।

मावा बाटी

यह एक मीठा व्यंजन है जिसमें मावा को गुड़ और घी के साथ गरमा कर बनाया जाता है। इसे खरबूजे के साथ परोसा जाता है।

टोंक के त्योहार और मेले Tonk festival & fair

टोंक के निवासी अपने त्योहारों और मेलों को बड़े उत्साह से मनाते हैं। यहां नवरात्रि, दिवाली, ईद, तीज, गणगौर और अन्य धार्मिक त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। साथ ही, साल में दो बार बड़े मेले भी लगते हैं:

देवनारायण मेला

यह मेला देवनारायण मंदिर में लगता है और देवनारायण की आराधना के लिए मनाया जाता है। इस दौरान भक्त दूर-दूर से आते हैं और मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।

बीसलपुर बांध मेला

यह मेला बीसलपुर बांध पर लगता है जब इसके द्वार खोले जाते हैं। इस दौरान लोग पानी में डुबकी लगाते हैं और आनंद मनाते हैं। कई प्रकार के खाद्य स्टॉल भी लगाए जाते हैं।

टोंक की हस्तशिल्प और कारीगरी

Tonk में चमड़े और नमदा की कारीगरी का एक लंबा इतिहास रहा है। यहां बने चमड़े के उत्पादों और नमदा गलीचों की भारतीय सेना भी खरीदारी करती है क्योंकि इनमें घर्षण नहीं होता और गोला-बारूद फटने का खतरा कम रहता है।

टोंक की लकड़ी की नक्काशी और बांसुरी बनाने की कला भी विख्यात है। यहां के कारीगर लकड़ी पर बेहतरीन नक्काशी करते हैं और मनमोहक बांसुरियां बनाते हैं। इन उत्पादों को पूरे भारत में निर्यात किया जाता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं

टोंक में स्वास्थ्य सुविधाओं का एक अच्छा नेटवर्क है जिसमें सरकारी और निजी अस्पताल, औषधालय और पॉलीक्लिनिक शामिल हैं। ये न केवल शहर बल्कि आसपास के गांवों के लोगों की भी बेहतर स्वास्थ्य देखभाल करते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी Tonk पीछे नहीं है। यहां स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थान मौजूद हैं जो बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। यहां कई पाठ्यक्रम और विषय उपलब्ध हैं।

जलवायु और पारिस्थितिकी

टोंक का मौसम आम तौर पर गर्म और शुष्क रहता है। यहां गर्मियों का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में यह 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। हालांकि, बरसात के मौसम में टोंक में अच्छी वर्षा होती है।

शहर के आसपास अरावली पहाड़ियां और वन भी मौजूद हैं जो जंगली जीवों और पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां पक्षियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं जो प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती हैं।

Tonk एक विरासत और संस्कृति का खजाना है जहां आप गौरवशाली इतिहास, विविध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ महसूस कर सकते हैं। यह राजस्थान की सभ्यता का एक अभिन्न अंग है जिसे देखने और अनुभव करने के लिए हर किसी को आना चाहिए।

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