Ajmer history in hindi,Ajmer Sharif

ghanshyam kumawat
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Ajmer history in hindi,Ajmer Sharif

Ajmer history in hindi –

अजमेर का इतिहास – राजस्थान का पाचवा सबसे बड़ा जिला

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Ajmer history in hindi – Ajmer : एक संक्षिप्त परिचय ,अजमेर का लघु परिचयअजमेर की स्थापना – अजयमेरु , Ajmerअजमेर का इतिहास , History Of Ajmer Rajasthanक्यों प्रसिद्ध है अजमेर – प्रमुख पर्यटन स्थलअजमेर की प्रमुख नदी -Rivers of Ajmerअजमेर शहर की प्रमुख भाषाएं – Ajmer historyअजमेर शरीफ की दरगाह का सच – Ajmer Sharif DargahAjmer Urs 2023:अजमेर का उर्स मेलाअजमेर की प्रसिद्ध 4800 kg की देग – Mughal period historic degsअजमेर के दर्शनीय स्थलअकबर का किला या गवर्नमेंट म्यूजियम – Ajmer ka killaअन्ना सागर झील, अजमेर -anna sagar ,Ajmerअजमेर जैन मंदिर – Jain Temple Ajmerतारागढ़ फोर्ट या अजय मेरु दुर्ग – meru durg , Ajmerअजमेर का प्रसिद्ध भोजन – Best food in ajmerAjmer की प्रमुख नृत्यAjmer  की प्रमुख फसलेंअजमेर का पशुपालनअजमेर से जुड़े कुछ मुख्य बिंदुअजमेर का पिनकोड क्या है ?अजमेर का क्या प्रसिद्ध है ?अजमेर का पुराना नाम क्या है ?अजमेर का मुख्य भोजन क्या है?अजमेर में कौन सा किला है? Ajmerनिष्कर्ष

चौहानों का शहर कहा जाने वाला अजमेर आज भारत में अपनी एक अलग पहचान रखता है। अजमेर पृथ्वीराज चौहान तथा ख्वाजा शरीफ की दरगाह के लिए पूरे विश्व मे प्रसिद्ध  है। अजमेर राजस्थान का पांचवा सबसे बड़ा शहर है। अजमेर भारत की राजधानी दिल्ली से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से अजमेर की दूरी तय करने में महज 7 से 8 घंटों का समय लगता है।

आज के इस आर्टिकल में अजमेर की संपूर्ण इतिहास के बारे में जानेंगे कि कैसे यह चौहानों की राजधानी बना कैसे यह दरगाह के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ।

Ajmer history in hindi,Ajmer Sharif
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 Ajmer : एक संक्षिप्त परिचय ,अजमेर का लघु परिचय

अजमेर भारत के राजस्थान राज्य की केंद्र भाग में स्थित एक प्रसिद्ध शहर है, जिसकी आकृति त्रिभुजाकार है। अजमेर 8481 किलोमीटर स्क्वायर में फैला हुआ एक जिला है ,जिसकी कुल आबादी 26 लाख के करीब है। अजमेर शहर दो धर्मों का मेल है जहां एक और पृथ्वी के निर्माता ब्रह्मा जी का मंदिर है दूसरी और शरीफ दरगाह है। अजमेर इत्र के लिए पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। अजमेर को राजस्थान का मक्का तथा धर्म नगरी भी कहा जाता है।

अजमेर की स्थापना – अजयमेरु , Ajmer

अजमेर की स्थापना सातवीं शताब्दी में अजय पाल चौहान ने अजय मेरु के नाम से की थी। अजमेर बारहवीं शताब्दी के अंत तक चौहानों का केंद्र भात बना रहा। अजमेर पहाड़ी इलाकों में बसा हुआ एक प्रसिद्ध है। यह शहर तारागढ़ पहाड़ी की ढाल में अरावली पर्वतमाला के बीच बसा हुआ है। अजमेर पर मेवाड़, मारवाड़ तथा मुगलों का कई वर्षों तक शासन रहा।

अजमेर का इतिहास , History Of Ajmer Rajasthan

अजमेर में सातवीं शताब्दी से चौहानों ने अपना शासन शुरू किया। अजमेर को सन 1131 में चौहान शासक अजय पाल ने बसाया। अजय मेरु शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है एक ऐसा पर्वत से कभी जीता नहीं जा सकता हो।

अजमेर का चौहानों के बाद मुगलों का शासन काल शुरू हुआ। मुगलों ने अजमेर पक्का ही वर्षों तक शासन किया, जिसके बाद अंग्रेजों ने अपना शासन कायम किया। आखिरी में 1 नवंबर 1956 में अजमेर को राजस्थान के जिले के रूप में विलय कर राजस्थान के 26 जिलों में से 1 स्थान प्रदान किया गया। उस समय वहां की एकमात्र मुख्यमंत्री थे श्री हरीभाऊ उपाध्याय।

क्यों प्रसिद्ध है अजमेर – प्रमुख पर्यटन स्थल

राजस्थान का हृदय कहा जाने वाला अजमेर पूरे विश्व में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। अजमेर के एक ओर सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का मंदिर है तथा दूसरी ओर ख्वाजा शरीफ की दरगाह , जहां धागा और चादर चढ़ाने से सारी मन्नते पूर्ण होती है। अजमेर अपने सबसे पुरानी मस्जिद, सबसे पहले पहाड़ी दुर्ग ,सबसे पहले मार्बल मार्केट तथा विश्व की सबसे बड़ी देग के लिए प्रसिद्ध है‌। अजमेर ही एक ऐसा शहर है जहां सबसे पहले अंग्रेजों ने ट्रेड की शुरुआत की थी।

अजमेर की प्रमुख नदी -Rivers of Ajmer

राजस्थान की गंगा तथा खारे व मीठे पानी की नदी कही जाने वाली लूनी नदी भी अजमेर की देन है। लूनी नदी उद्गम नाथ पहाड़ी से बताया जाता है। इस नदी की यह खासियत है कि यह अजमेर से निकलते समय मीठी पानी वाली होती हैं परंतु बाड़मेर के बालोतरा से आगे जाते जाती है खारे पानी के रूप में बन जाती है।

अजमेर शहर की प्रमुख भाषाएं – Ajmer history

अजमेर शहर में कई भाषाएं बोली जाती है जिसमें हिंदी प्रमुख भाषा है। यहां हिंदी भाषा के अतिरिक्त दोढारी, मारवाड़ी, हाडोती तथा मेवाड़ी भाषा बोली जाती है।
मारवाड़ी तथा हिंदी भाषा तो आपको राजस्थान के हर शहर में सुनने को मिल जाएगी परंतु कुछ भाषाएं आपको किसी विशेष शहर में ही सुनने को मिलेगी।

अजमेर शरीफ की दरगाह का सच – Ajmer Sharif Dargah

अजमेर की सबसे पवित्र तथा सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक अजमेर शरीफ की दरगाह है। अजमेर शरीफ की दरगाह का पूरा नाम सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती रहमतुल्ला या गरीब नवाज की दरगाह है। इस दरगाह के बारे में कहा जाता है कि अकबर ने यहां 5 बार दिल्ली से अजमेर की पैदल यात्रा की थी।

 

अजमेर शरीफ के आते ही बड़े धर्मों के अभिनेता तथा नेता चादर चढ़ाने आते हैं। यहां के लोगों का कहना है कि जो कोई भी गरीब नवाज के यहां मन्नत मांगता है तो उसकी मन्नत अवश्य पूर्ण होती है।

Ajmer Urs 2023:अजमेर का उर्स मेला

Ajmer में प्रति वर्ष उर्स मेले का आयोजन होता है इसमें हजारों लोग शामिल होते हैं। यह मेला सूफी संत हजरत मोहम्मद  जी की पुण्यतिथि के उपलक्ष में आयोजित किया जाता है। उर्स शुरुआत रमजान के चांद दिखने के साथ हो जाती हैं। उर्स का मेला उन दिनों तक चलता है जिसमें देश-विदेश के कई लोग शामिल होते हैं। इस मेले के दौरान देर रात तक वालियों तथा महफिलों का आयोजन होता है।

अजमेर की प्रसिद्ध 4800 kg की देग – Mughal period historic degs

अजमेर मे विश्व की सबसे बड़ी देग है। इस देग की क्षमता 4800kg हैं। इस देग का निर्माण अकबर ने करवाया था। अजमेर में एक और देग हैं जिसे छोटी देग के नाम से भी जाना जाता है, जिसका निर्माण जहांगीर के द्वारा कराया गया था। इस देग क्षमता 2240 kg है।
इन सभी देगो में दरगाह के आए सभी लोगों के लिए भोजन बनाया जाता है। इस भोजन के लिए कई लोग राशन के रूप में तथा कुछ लोग नकद के रूप में धनराशि का दान करते हैं।

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अजमेर के दर्शनीय स्थल

अढाई दिन का झोपड़ा

अढाई दिन का झोपड़ा  का निर्माण विग्रहराज चतुर्थ द्वारा सन् 1153 में करवाया गया था। यह एक पाठशाला थी जिसका नाम संस्कृत कंठवर्णन था। अढाई दिन की झोपड़ी को कुतुबुद्दीन ऐबक ने मोहम्मद गोरी के कहने पर संन् 1194 में टुड़वा कर यहां मस्जिद बनवा दी थी। इस मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यह भारत की सबसे पुरानी मस्जिद है।

इस अढाई दिन के झोपड़े के नामकरण के पीछे एक आ जाता है कि यहां अढाई दिन का पंजाब शाखा का मेला लगता है तथा इसके बारे में यह भी कहा जाता है कि इसका निर्माण अढ़ाई दिन में किया गया था।

अकबर का किला या गवर्नमेंट म्यूजियम – Ajmer ka killa

अकबर के किले का निर्माण अकबर ने गुजरात पर निगरानी रखने तथा अपना शासन चलाने के लिए सन 1570 ईस्वी में करवाया था। इसके लिए को दौलत खाना भी कहा जाता है। अकबर के किले के बारे में कहा जाता है कि अकबर ने हल्दीघाटी की युद्ध की संपूर्ण राजनीति इसी किले के अंदर बनाई थी। यहां पर जहांगीर ने अपना दरबार लगाया था तथा ब्रिटिश ने अपने ट्रेड की शुरुआत करने की अनुमति इसी जगह से मिली थी। 19 अक्टूबर 1968 में से भारत सरकार द्वारा म्यूजियम में बदल दिया गया था।

अन्ना सागर झील, अजमेर -anna sagar ,Ajmer

Ajmer की शान कही जाने वाली अन्ना सागर झील का निर्माण अर्णोराज ने सन् 1137 में करवाया था । इस झील के किनारे एक सुंदर बाग बना हुआ है जहां पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस बाग का निर्माण जहांगीर द्वारा करवाया गया था । इस बाग का पुराना नाम दौलत बाग था जिसे हाल ही में बदलकर सुभाष बाग या सुभाष उद्यान कर दिया गया है।

अजमेर जैन मंदिर – Jain Temple Ajmer

सोने की नसीहत कहा जाने वाला यह जैन मंदिर सन 1865 ईस्वी में मूलचंद जी सोनी तथा टीकम चंद सोनी के द्वारा बनाया गया था। इस मंदिर के एक भाग में ऋषभदेव तथा आदिनाथ के मंदिर है तथा दूसरे भाग में सोने की अयोध्या नगरी बनी हुई है । इस अयोध्या नगरी के निर्माण में लगभग 1000 किलो सोने का प्रयोग किया गया है इस मंदिर को लाल मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि इस मंदिर के निर्माण में लाल पत्थर का उपयोग किया गया।

तारागढ़ फोर्ट या अजय मेरु दुर्ग – meru durg , Ajmer

अजमेर का तारागढ़ का किला भारत का पहला पहाड़ी दुर्ग है। इसका नामकरण पृथ्वीराज चौहान की पत्नी तारा के नाम पर किया गया था ।राजपूताना की कूंजी कहे जाने वाले तारागढ़ दुर्ग की वर्तमान हालत बहुत ही खराब है , यह दुर्ग पूर्ण रुप से जर्जर हो चुका है।

अजमेर का प्रसिद्ध भोजन – Best food in ajmer

भारत के हर राज्य के हर प्रांत का अपना-अपना प्रसिद्ध भोजन होता है ।इसी तरह अगर आप अजमेर आये तो यहां आपको सोहन हलवा , पुष्कर का मालपुआ ,दाल पकवान इन सभी को एक बार जरूर ट्राई करना चाहिए। इन सभी पकवानों का स्वाद आपको अजमेर के अलावा कहीं नहीं मिलेगा यहां लोग इन सभी व्यंजनों का सेवन बड़े ही चाव से किया करते हैं। इसके अलावा सर्दियों में गजक तथा रेवाड़ी भी प्रमुख है।

Ajmer की प्रमुख नृत्य

अजमेर क प्रमुख नृत्य में चरे नित्य हैं इस नृत्य के लिए फल्गु बाई प्रसिद्ध है। इसके अलावा हो गई तथा कालबेलिया नृत्य भी किए जाते हैं। अजमेर घूमने आए सैलानियों के लिए अजमेर की यह नित्य उनके लिए आकर्षण का केंद्र है

Ajmer  की प्रमुख फसलें

अजमेर की मुख्य फसलों में ज्वार तथा आंवला प्रमुख है। अजमेर में सबसे ज्यादा खेती ज्वार तथा आंवला की ही की जाती है । अजमेर राजस्थान का सर्वाधिक ज्वाह तथा आंवला उत्पादक क्षेत्र है ।अजमेर के पुष्कर में सर्वाधिक रूप से गुलाब की खेती की जाती हैं।

अजमेर का पशुपालन

राजस्थान में सर्वाधिक मात्रा में गिर नस्ल की अजमेरी गाय इसी क्षेत्र में पाई जाती हैं ,इसलिए यहां पशुपालन में गाय का प्रमुख स्थान है। राजस्थान की सबसे पुरानी दूध देयरी है इसे पदमा देयरी के नाम से जाना जाता है जो इसी क्षेत्र में अजमेर जिले में स्थित है।

अजमेर से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु

 

राजस्थान की सबसे पुरानी दूध डेयरी जिसे पदमा डेयरी के नाम से जाना जाता है वह अजमेर जिले में स्थित है

।राजस्थान की पहली सूती कपड़ा मिल राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है। इस मिल की स्थापना सन 1889 में की गई थी।

राजस्थान की सबसे हाई सिक्योरिटी जेल अजमेर की घोघरा घाटी में स्थित है।

अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की शुरुआत अजमेर की नसीराबाद से हुई थी

अजमेर ने स्थित मसूदा गांव राजस्थान का पहला पूर्ण साक्षरता  वाला गांव है।

राजस्थान की पहली कोऑपरेटिव सोसायटी सरकारी समिति 1905 में बीनाई अजमेर में स्थापित की गई।

राजस्थान का पहला वाईफाई युक्त कस्बा बीनाई अजमेर में स्थित है।

राजस्थान की कोटा महोली के लिए बीनाई अजमेर गांव प्रसिद्ध है।

ढोला और मारू की शादी का तोरण अजमेर के केकड़ी गांव में स्थित है।

jaisalmer ka kila सोनार दुर्ग

अजमेर का पिनकोड क्या है ?

अजमेर का पिनकोड 305001 है।

अजमेर का क्या प्रसिद्ध है ?

अजमेर के बहुत से स्थान है जो प्रसिद्ध है जिनमे ख्वाजा मोईनुद्दीन चिस्ती की दरगाह ,अकबर का किला ,आनासागर झील ,ढाई दिन का झोपड़ा ,तथा तारागढ़ का किला प्रमुख है।

अजमेर का पुराना नाम क्या है ?

अजमेर का पुराना नाम अजयमेरु है जो अजयराज चौहान ने रखा था।

अजमेर का मुख्य भोजन क्या है?

अजमेर में सर्दियों के समय रेवडी ,गजक तथा तिलपट्टी का ज्यादा उपयोग किया जाता है।

अजमेर में कौन सा किला है? Ajmer

तारागढ़ किला अजमेर का किला है जो राजस्थान का पहला पहाड़ी किला है।
निष्कर्ष
अजमेर राजस्थान के प्रसिद्ध जिलों में से एक है जो अपनी सबसे पुरानी मस्जिद ,पुराने किलो तथा मार्बल के लिए पुरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। अजमेर दो धर्मो तथा संस्कृतियों का मेल है जहा एक और ब्रम्हा जी तो दूसरी और अजमेर शारिफ की दरगाह है। ढोला मारु जैसी प्रेम कहानियो का आज भी अजमेर बखान कर रहा उनकी प्रेम निशानी के रूप में विवाह का तोरण आज भी अजमेर के केकड़ी गांव में महफूज है।

 

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