चंदेरी युद्ध || एक विद्रोही की विजय

ghanshyam kumawat
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चंदेरी युद्ध || एक विद्रोही की विजय

चंदेरी युद्ध || एक विद्रोही की विजय

भारतीय इतिहास के कुछ पन्ने ऐसे हैं जिन्हें पढ़ते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। चंदेरी, मध्यप्रदेश में एक ऐतिहासिक नगर, जिसे आज अपनी साड़ियों की शिल्प कला के लिए जाना जाता है, उसी चंदेरी के इतिहास की एक अहम घटना है बाबर का विध्वंस। इस घटना में महरानी मणिमाला सहित 1500 क्षत्राणियों ने जौहर किया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का विवरण भारतीय इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण पन्ना है।

इस ब्लॉग में हमने चंदेरी के ऐतिहासिक इवेंट के बारे में जानकारी दी है जो भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से को दर्शाती है। यह घटना महिलाओं के साहस और वीरता का प्रतीक है। इसे समझने और सम्मान करने से हमारी समाज में समानता और समरसता की भावना विकसित हो सकती है।

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चंदेरी का इतिहास

चंदेरी, मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग और अशोकनगर जिले में स्थित है। उस समय चंदेरी पर प्रतिहार वंशीय शासक मेदनीराय का शासन था। वहां रेशम का व्यापार बड़ी संख्या में होता था और यह एक बड़ा शिल्प केंद्र भी था। मेदनीराय ने बाबर से युद्ध के लिए खानवा मैदान में अपनी सेना लेकर गए, लेकिन उनकी पराजय हुई। इस युद्ध में कुछ गद्दारी और तोपखाने की तकनीक ने रोक डाली थी, जिससे राणा जी की हार हो गई।

विविधता में रंजित भारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास के कुछ पन्ने ऐसे हैं जो रक्त से रंजित हैं। चंदेरी, मध्यप्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण इतिहास, एक ऐसा ही पन्ना है जो रोंगटे खड़े करता है। यही चंदेरी, जिसकी साड़ियों की शिल्प कला आज भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। चंदेरी की इस महान विरासत के बीच, मुगल साम्राज्य के इतिहास में बाबर का एक घमासान घटा। इस विध्वंस के बीच महरानी मणिमाला सहित 1500 क्षत्राणियों ने चंदेरी में जौहर किया।

युद्ध का संघर्ष: चंदेरी की अनगिनत कहानियाँ

यह युद्ध वर्ष 1528 के जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुआ था। चंदेरी दरबाजे को खोलने की तिथि 28 और 29 जनवरी की रात थी। रात भर वीरों का खून बहा, स्त्रियों की चिता जली। कुछ इतिहासकारों के मुताबिक विध्वंस की तिथि 28 जनवरी मानी गई, जबकि कुछ ने 29 जनवरी 1528 को इस दुर्गाह में विध्वंस का विवरण दिया।

चंदेरी: ऐतिहासिक नगर का गौरव

चंदेरी, मध्यप्रदेश के ग्वालियर संभाग और अशोकनगर जिले का एक ऐतिहासिक नगर है। इस नगर में रेशम का व्यापार एक बड़ा केंद्र था, और तब चंदेरी अंतराष्ट्रीय रेशम के व्यापार का महत्त्वपूर्ण केंद्र था।

युद्ध की घटना: बाबर का प्रवेश

बाबर ने 9 दिसम्बर 1527 को सीकरी से रवाना होकर चंदेरी की ओर बढ़ा। इससे पहले मेदिनी राय ने मालवा के अन्य राजाओं को संदेश भेजकर सहायता के लिए अपील की और अपनी सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए। चंदेरी का किला पहाड़ी पर बना था, जो देश के सुरक्षित किलों में से एक माना जाता था।

विध्वंस और जौहर: अत्याचार की कहानी

बाबर ने चंदेरी में 1528 जनवरी में अपना हमला किया। उनकी फौज ने चंदेरी को लूटा, तबाह किया, और अत्याचार किया। बाबर ने राजपूतों को गुलाम बनाया और महरानी मणिमाला सहित 1500 क्षत्राणियों ने जौहर किया। चंदेरी में जौहर के स्मृति स्थल आज भी मौजूद हैं, जहां महिलाएं पूजा करने जाती हैं।

समाप्ति: एक विद्रोही की विजय

बाबर का विजयी होना सिद्ध हो गया, और राजपूत राजाओं के खिलाफ उन्होंने अपनी शक्ति बढ़ाने का सिलसिला शुरू किया। इस युद्ध में राजपूतों की हार ने ऐतिहासिक महत्व रखा और बाबर की विजय को नया आयाम दिया।

बाबर ने चंदेरी में पंद्रह दिन रहकर खजाना खोजा, लाशों के ढेर किए, गांवों में लूटपाट की और वहाँ का प्रशासन अय्यूब खान को सौंपकर वापस लौट गया।

mardani kiran devi 

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