Somnath Temple || इतिहास तथा विध्वंश

ghanshyam kumawat
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Somnath Temple || इतिहास तथा विध्वंश

Somnath Temple || इतिहास तथा विध्वंश

Somnath Temple , भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका अनूठा और गहरा इतिहास है। इस मंदिर के इतिहास में महान विक्रमादित्य से लेकर महान आज़ादी संग्राम सेनानी के योगदान तक है।

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सोमनाथ मंदिर का इतिहास

प्राचीन काल

सोमनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे भगवान परशुराम जी की स्थापना मानी जाती है। इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्त्व है और यह पूरे विश्व के पर्यटकों का आकर्षण रहा है। यूनान और रोम से भी पर्यटक इस मंदिर को देखने आते थे।

 मध्यकालीन काल

नौवीं शताब्दी से पहले इस मंदिर ने पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित किया, लेकिन नौवीं शताब्दी के बाद लुटेरों और आतंकवादियों के लालच का केंद्र बन गया। मध्यकाल का इतिहास इस मंदिर के विध्वंस, लूट और हत्याकांड से भरा है।

विवादों का केंद्र

सोमनाथ मंदिर पर एकाधिक बार आक्रमण हुआ। इसे 1026 में महमूद गजनवी ने विध्वंसित किया था। इसके बाद भी इस मंदिर पर अनेक बार हमले हुए और यह लूट और विध्वंस का केंद्र बना रहा।

समकालीन संवर्धन

अब जब हम  मंदिर की वर्तमान स्थिति की बात करते हैं, तो इसका श्रेय श्री के एम मुंशी और सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है। उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य किया।

सोमनाथ मंदिर अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाएं

कई ऐतिहासिक प्रमुख घटनाएं इस मंदिर के संदर्भ में हुईं, जैसे कि अलाउद्दीन खिलजी, मुजफ्फर शाह, औरंगजेब आदि के आक्रमण। ये घटनाएं मंदिर के संरक्षण और उसके इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

महमूद गजनवी की हमला योजना

महमूद ने चाहा कि उसका हमला ऐसी योजना हो जिससे युद्ध टल सके और वह सीधे सोमनाथ पहुंच सके। उसने अपने एजेंटों को विभिन्न रूपों में विद्यमान बनाया था ताकि वे मंदिर में प्रवेश कर सकें।

गजनवी का आक्रमण

महमूद की सेना ने मंदिर के पास वीरावल पर धावा बोला और वह मार्ग बंद कर दिया गया। गजनवी ने वीरावल में लूट मचाई, जिससे मंदिर के परिसर में भागदौड़ हुई और वहां की भारी भीड़ मंदिर में छुपने आई।

 विध्वंस की भयानकता

गजनवी की सेना ने मंदिर की सुरक्षा को चारों ओर से बांध दिया और उन्होंने वहां पर उत्सव में भाग लेने वाले लोगों को घेर लिया। उन्होंने संस्कृति और धर्म के प्रति अत्याचार किया।

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण

सोमनाथ मंदिर को कई बार नष्ट होने के बावजूद पुनर्निर्माण किया गया है। बीसवीं सदी के मध्य में, सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी ने मंदिर के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों का उद्देश्य मंदिर को सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता देना था, जिससे यह भारतीय इतिहास में एक महान प्रतीक बना।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता

इसके इतिहास के अलावा, मंदिर का बहुत अधिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता है। यह हिंदुओं के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल है और भक्तों को आकर्षित करता है। मंदिर की शिल्पकला में कारीगरी और उसकी महान संरचना, प्राचीन भारतीय शिल्पकला की समृद्ध धरोहर को दर्शाती है।

सोमनाथ मंदिर कला और साहित्य में

सोमनाथ मंदिर का इतिहास और उसका साहस विभिन्न साहित्यिक कार्यों, कविताओं, संगीत और कला रूपों में समाहित है। कई कलाकार और लेखकों ने मंदिर की कहानी को अपने कृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

समकालीन भारत में महत्त्व

आधुनिक समय में, सोमनाथ मंदिर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक भक्ति का प्रतीक बना है। इसकी संरक्षण और देखभाल देश के इतिहासिक जड़ों को सम्मानित करने की प्रतिज्ञा को दर्शाती है, साथ ही विभिन्न धार्मिक परंपराओं का सम्मान करती है।

वैश्विक पहचान

मंदिर की कहानी राष्ट्रीय सीमाओं को पार करके वैश्विक स्तर पर मान्यता और सराहना प्राप्त कर चुकी है, इसकी ऐतिहासिक महत्ता, वास्तुकला की सुंदरता, और धार्मिक महत्त्व के लिए।

 

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