Nagaur – संगमरमर नगरी

Nagaur – संगमरमर नगरी

Nagaur राजस्थान के नागौर  ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। नागौर अपने धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध शहर है तथा  ज़िले का मुख्यालय  है। नागौर जिला 25°26\’ और 26°41\’ उत्तरी अक्षांश और 72°11\’ और 74°16\’ पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। नागौर 7  जिलों बीकानेर , चुरू , सीकर , जयपुर, अजमेर, पाली, जोधपुर के बीच स्थित है, नागौर राजस्थान का पाँचवाँ सबसे बड़ा जिला है, जिसका विशाल भूभाग 17,718 वर्ग किलोमीटर फैला है।

राजस्थान के 33 जिलों की कड़ी मे हम आपको आज नागौर के इतिहास तथा पर्यटन स्थलों से अवगत करायेगे और साथ ही आपको नागौर के नामकरण , मंदिरों ,नागौर के वातावरण से भी अवगत करायेगे ।

आइए जानते है नागौर के बारे मे ।

Nagaur - संगमरमर नगरी
Nagaur – संगमरमर नगरी

नागौर का लघु परिचय

सूफी मत का मशहूर केंद्र नागौर का भौगोलिक विस्तार मैदान, पहाड़ियों, रेत के टीलों का एक अच्छा संयोजन है और इस तरह यह महान भारतीय थार रेगिस्तान का एक हिस्सा है। नागौर का वर्तमान जिला राजस्थान राज्य के केंद्र में एक स्थान पाता है। राज्यों के विलय से पहले, नागौर तत्कालीन जोधपुर राज्य का हिस्सा रह चुका है । स्वतंत्रता के बाद, नागौर को देश में उस स्थान के रूप में चुने जाने का सम्मान मिला, जहां से स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरू जो देश के पहले प्रधानमंत्री रह चुके है के  द्वारा 2 अक्टूबर 1959 को भारत लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण प्रक्रिया शुरू की गई।

नागौर का इतिहास – Nagaur History 

नागौर की इतिहास को लेकर अगर बात की जाए तो नागौर का पुराना नाम अहिछत्रपुर  था जिसका उल्लेख महाभारत काल में आपको देखने को मिलता है। इस नगर की स्थापना नागवंश होने की थी। नागिन 100 की कुरुवंश के द्वारा बिना सो जाने के बाद यहां चौहानों ने अपना शासन कायम किया तथा अपनी राजधानी स्थापित की। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया तब फिर से नागवंशी सत्ता में आए और चौहानों को हराकर अहिछत्रपुर को अपने राज्य के रूप में स्थापित किया। तथा राज्य का नाम बदलकर Nagaur कर दिया। इसके साथ ही नागौर की धरती पर कई वीरों ने यहां पर जन्म लिया जिनमें सबसे प्रसिद्ध हुए वीर तेजाजी वीर तेजाजी को नागों का देवता भी कहा जाता है ।

नागौर  के मशहूर शेख हमीदुद्दीन नागौरी

राजस्थान में अजमेर के बाद नागौर सूफी मत का मशहूर केन्द्र रहा है । यहाँ पर ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य शेख हमीदुद्दीन नागौरी (1192-1274 ई.) ने अपने गुरु के आदेश के अनुसार सूफी मत का प्रचार-प्रसार किया। इनका जन्म दिल्ली में हुआ था लेकिन इनका अधिकांश समय नागौर में ही बीता। इन्होंने अपना जीवन एक आत्मनिर्भर किसान की तरह गुजारा और नागौर के सलाऊ गांव जो की नागौर से 2 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है वहा पर खेती की।

शेख हमीदुद्दीन नागौरी पूर्णतः शाकाहारी थे एवं अपने शिष्यों से भी शाकाहारी रहने को कहते थे। इनकी ग़रीबी को देखकर नागौर के प्रशासक ने इन्हें कुछ नकद एवं ज़मीन देने चाहा जिसको इन्होंने पूर्ण रूप से अस्वीकार कर दिया। हमीदुद्दीन नागौरी समंवयवादी थे इन्होंने भारतीय वातावरण के अनुरूप सूफी आन्दोलन को आगे बढ़ाया।

नागौर में चिश्ती सम्प्रदाय के इस सूफी संत की मजार आज भी याद दिला रही है। इस मजार पर मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने एक गुम्बद का निर्माण करवाया था जो 1330 ई. में बनकर पूर्ण हुआ। नागौर को सूफी मत के केन्द्र के रूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में यहाँ के सूफी संत ख्वाजा मखदूम हुसैन नागौरी (15वीं शताब्दी) का नाम उल्लेखनीय है।

नागौर सूफी सम्प्रदाय का केन्द्र बना रहा जब 16 वीं शताब्दी में Nagaur में राजपूत शाक्ति के उदय हुआ । अकबर के दरबारी शेख मुबारक के पिता एवं अबुल फ़जल के दादा शेख ख़िज़्र नागौर में ही आकर बस गये थे। नागौर की प्राचीन इमारतों में अतारिकिन का विशाल दरवाज़ा प्रसिद्ध है, जिसे 1230 ई. में इल्तुतमिश ने बनवाया था।

नागौर का  स्थापना तथा नामकरण – Nagaur ki sthapna  

नागौर का निर्माता चौहान शासक  सोमेश्वर के सामंत कैमास को माना जाता है। नागौर किले की नींव 1154 ई. में रखी गयी। दूसरी शताब्दी में नागवंशियों ने नागौर का किला बनवाया जिसका  पुनः निर्मणा मोहम्मद बाहलीम जो गज़निवेट्स के गवर्नर थे उन्होंने करवाया। नागौर के स्थापना का दिन आखातीज 1553 ई को  माना जाता है । अक्षय तृतीया पर नागौर शहर का स्थापना दिवस है।

ईसा की चौथी शताब्दी में यहाँ नागों द्वारा दुर्ग का निर्माण किया गया था। तब से इस दुर्ग का नाम नागदुर्ग पड़ गया। कालांतर में नागदुर्ग शब्द ही नागौर बना।नागौर दुर्ग भारत के प्राचीन क्षत्रियों द्वारा बनाये गये दुर्गों में से एक है, माना जाता है कि इस दुर्ग के मूल निर्माता नाग क्षत्रिय ही माने जाते थे।

नागौर का वातावरण – Nagaur environment

नागौर में एक उपोष्णकटिबंधीय जलवायु  है, जिले का वार्षिक तापमान 29.63ºC (85.33ºF) है और यह भारत के औसत से 3.66% अधिक है। नागौर में आमतौर पर लगभग 32.69 मिलीमीटर (1.29 इंच) वर्षा होती है और सालाना 49.09 वर्षा के दिन (13.45%) वर्षा होती है। नागौर की जलवायु को मरुस्थलीय जलवायु कहते हैं,  वर्ष के दौरान, वस्तुतः वर्षा नहीं होती है। कोपेन-गीजर जलवायु वर्गीकरण BWh की श्रेणी से संबंधित इस विशेष मौसम पैटर्न की पहचान करता है।

नागौर के पर्यटन स्थल – Nagaur Visiting Places

राजस्थान में अजमेर के बाद नागौर सूफी मत का मशहूर केन्द्र रहा ही है साथ ही पर्यटन की दॄष्टि से भी महत्वपूर्ण भी रहा है। यहाँ के किलो तथा मंदिरो की बनावट देखते ही बनती है।  खासतौर पर  नागौर के मकराना के संगमरमर के पत्थरो से बने मंदिर यहाँ के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।  आइये जानते है नागौर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जिन्हे आपको अवश्य देखने जाना चाहिए।

नागौर का किला – Nagaur fort 

नागौर का किला या नागौर फोर्ट ये नागौर से करीबन 137 km  उत्तर के क्षेत्र में मौजूद है।  किले का परकोटा लगभग 5000 फीट लंबा है तथा इसकी प्राचीर में 28 विशाल बुर्जे लगी हुई है, नागौर  किले 6 विशाल दरवाजे है, नागौर का यह किला 2100 गज के घेरे मे फैला हुआ है।

नागौर  किले में 1570 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने नागौर दरबार का आयोजन किया था और नागौर का किला अपने अध्भुत और विशाल किलो की वजह से विश्व भर में प्रसिद्ध है। नागौर किले की खासियत यह है की इस किले की बनावट इस प्रकार से  की गई है की कोई दुश्मन अगर हमला कर दे तो इस पर जल्दी जीत हासिल नहीं कर सकता।  दुश्मनो के तोप के गोले इस किले पर ज्यादा नुकशान नहीं कर सकते, क्यूंकि यह किला मिट्टी से बनाया गया है।

 ग्लास जैन मंदिर – Glass Jain Temple , Nagaur

नागौर का जैन ग्लास मंदिर पूरी तरह से कांच से बना हुआ  मंदिर है जो कमला टॉवर के पीछे स्थित है।  ग्लास जैन मंदिर जैन समुदाय के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। यहाँ पर आने वाले यात्री कांच के इस काम को देखकर बहुत  हैरान हो जाते है । यह जैन ग्रंथों के रूप में उसकी प्राचीन कला को भी दर्शाता है। माहेश्वरी महल क्षेत्र में स्थित, जैन कांच मंदिर भगवान महावीर के अद्वितीय रूप  के लिए प्रसिद्ध है, जो ओर  23 जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों में  देखने को नहीं मिलता, और यहा पर सारा काम संगमरमर का  किया गया है।

कुचामन किला – Kuchaman Fort, Nagaur

कुचामन फोर्ट यह दुर्ग राजस्थान के सबसे पुराने दुर्गों में से है। कुचामन  किला पर्वत के सबसे ऊपरी हिस्से पर स्थित है । कुचामन फोर्ट का  निर्माण जालिम सिंह मेड़तिया ने 750 ईo में कराया था । जालिम सिंह मेड़तिया  के शासनकाल में ऐसे ही बहुत  दुर्गों का निर्माण हुआ जिसमे मण्डौर, जालौर, कुचामन, कन्नौज, ग्वालियर के किले प्रमुख हैं। कुचामन फोर्ट ये दुर्ग प्रतिहार राजाओं के अत्यधिक समृद्ध होने का प्रमाण देते हैं।

कुचामन का किला अपने प्रखर और भीमकाय परकोटो, 32 दुर्गों, 10 द्वारो और विभिन्न प्रतिरोधक क्षमता वाला किला कहा जाता है।कुचामन फोर्ट यह एकमात्र अनोखी वास्तुकला वाला किला है। कुचामन किले में जल संरक्षण और प्रबंधन की अच्छी व्यवस्था है। किले में कई भूमिगत टैंक आज भी विद्यमान है कुचामन किले में कई भूमिगत गुप्त ठिकाने, प्राचीन अंधकूप, कारागार हैं जिन्हें आज भी देखा जा सकता है। वर्तमान मे अब ये हेरिटेज होटल में तब्दील हो गया है और यहा बौलीवुड फिल्मो की सूटिंग होती रहती है।  यह कुचामन का दुर्ग राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है।

मीरा बाई मन्दिर –  Meera Temple,Nagaur

मीरा बाई टेम्पल यह प्रसिद्द मन्दिर भारत के राजस्थान राज्य के नागौर जिले के मेड़ता नामक स्थान में स्थित है। यहाँ हर वर्ष लाखों की संख्या में दर्शन के लिए लोग आते – जाते रहते है।  मेड़ता मे  प्रसिद्ध कृष्ण भक्त-कवयित्री मीराबाई का जन्म स्थान माना जाता है। मीराबाई का जन्म संवत् 1564 विक्रमी में मेड़ता में दूदा जी के चौथे पुत्र रतन सिंह के घर हुआ।  मीरा बाई का जन्म राठौर राजपूत परिवार में हुआ था ।  मीरा बाई का विवाह मेवाड़ के सिसोदिया राज परिवार में हुआ था।

मीरा बाई  बचपन से ही कृष्ण भक्ति में रुचि लेने लगी थीं। उदयपुर के महाराणा भोजराज इनके पति थे जो मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र थे। विवाह के तत्पश्चात  ही उनके पति का देहान्त हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया, किन्तु मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुईं। मीरा बाई वे संसार की ओर से विरक्त हो गयीं और साधु-संतों की संगति में हरि कीर्तन करते हुए अपना समय व्यतीत करने लगीं थी।

भवांल माता मंदिर – Bhanwal Mata Temple , Nagaur

भंवाल माता के मंदिर की खासियत अन्य मंदिरों और शक्तिपीठों में सबसे अलग है। दूसरे देवी मंदिरों की तरह यहां माता को सिर्फ लड्डू, पेड़े या बर्फी का नहीं, बल्कि शराब का भोग भी लगता है। भवांल माता मंदिर में शराब को किसी नशे के रूप में नहीं, बल्कि प्रसाद की तरह चढ़ाया जाता है। काली माता ढाई प्याला शराब ही ग्रहण करती हैं।

चांदी के प्याले में शराब भरकर मंदिर के पुजारी अपनी आंखें बंद कर देवी मां से प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह करते हैं तथा  कुछ ही क्षणों में प्याले से शराब गायब हो जाती है। इस  प्रक्रिया को  3 बार किया जाता है। यह मान्यता है कि तीसरी बार प्याला प्रसाद के रूप में आधा भरा रह जाता है। कहा जाता है कि काली माता उसी भक्त की शराब का भोग लेती है, जिसकी मनोकामना या मन्नत पूरी होनी होती है और वह सच्चे दिल से भोग लगाता है।

मकराना – Makrana , Nagaur

मकराना भारत के राजस्थान राज्य के नागौर ज़िले में स्थित एक नगर है तथा  तहसील भी है,  जिसमें 136 से अधिक गाँव शामिल हैं।  मकराना  यह नागौर ज़िले की सबसे विसाल तहसील है। मकराना यहाँ के श्वेत पत्थर और संगमरमर के लिए प्रसिद्ध है। मकराना के संगमरमर का उपयोग ताजमहल के निर्माण में किया गया था और  मकराना बड़ा कस्बा है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर संगमरमर का खनन किया जाता है।  मकराना  यहाँ के निवासियों का मुख्य व्यवसाय संगमरमर खनन है।

लाडनू – Laadnoo, Nagaur

राजस्थान के निर्माण से पूर्व लाडनूं, जोधपुर रियासत कि सीमा पर बसा एक महत्वपूर्ण कस्बा था।  शिलालेखों तथा इतिहासविदों के अनुसार लाडनूं प्राचीन अहिछत्रपुर का हिस्सा था, जिस पर करीब 2000 वर्षो तक नागवंशीय राजाओं का अधिकार रहा था। उसके बाद में परमार राजपूतों ने उन से अहिछत्रपुर को छिन लिया।

लाडनू गाव  एक पुराना व्यापारिक मार्ग पर बसा हुआ है। पुरातात्विक साक्ष्य इसके 2000 वर्ष पहले से आबाद होने के सबूत देते हैं। वही 1857 के विद्रोह के कुचले जाने बाद हारे हुये सैनिक भागते हुये इधर से गुजरे तो वे इतिहास में कालो की फौज के नाम से दर्ज हुये थे।

मरोठ – Maroth ,Nagaur

मरोठ भारत के राजस्थान राज्य के नागौर जिले के नवा में स्थित एक गाँव है।  गाँव के आसपास के क्षेत्र का नाम गौराती है , जिसका अर्थ है \”गौरों की भूमि\”। यह क्षेत्र महाराजा विघराज चौहान द्वारा महाराजा बावन गौर को 1260 ईस्वी में दी गई रियासत थी। 1659 ईस्वी में, इसे औरंगजेब ने महाराजा रघुनाथ सिंह को युद्ध में उनकी सेवा के लिए प्रदान किया था। इस समय अवधि के दौरान गौर राजपूतइस क्षेत्र के लोगों ने आईन-ए-अकबरी के अनुसार रियासत के कर का 6.65% से अधिक का भुगतान किया।

मरोठ नवा और कुचामन शहर के रेलवे स्टेशन दोनों से लगभग 11 km  (6.8 मील) की दूरी पर स्थित है, गांव अपने पुरातात्विक स्थलों और रुचि के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। 2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार, कुल 1,417 परिवार गांव में रहते हैं, जिनकी आबादी 8,330 है, जिनमें 4,344 पुरुष और 3,986 महिलाएं हैं ।

नागौर के रोचक तथ्य – Nagaur facts 

अहिच्छत्रपुर( Nagaur) दुर्ग की सुरक्षा करने के लिए 7 दरवाजों के निर्माण कराया गया था।  इनका मुख्य उद्देश्य था बाहरी हमलावरों से रक्षा करना तथा बाहरी दुश्मनों के हमले की सूरत में किले से ध्यान भ्रमित करने के लिए ये सात दरवाजे बनवाए गए थे।  एक खास बात यह भी है कि नागौर के हर दरवाजे के बाहर गणेश जी का मंदिर बनाया गया |

नागौर के लोकगीत – Nagaur lokgeet

नागौर के कई प्रसिद्ध लोकगीत है जो आपको नागौर मे अवश्य सुनने को मिल जायेगे । इन गीतों मे तू कलाली नगोर री , इटल पीतल म्हारों बेडलों ,नींबुड़ो , मखनों तथा कमली प्रमुख है ।

नागौर की प्रसिद्ध हॉटल – Nagaur famous Hotel

नागौर मे कई होटल है जिनमे सबसे प्रसिद्ध होटल इंदर पैराडाइज है ।

लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्न –

नागौर का पिनकोड़ क्या है ?
नागौर का पिकोड 341001 है ।

नागौर से जोधपुर की दूरी कितनी है  ?
नागौर से जोधपुर की दूरी 145 किलोमीटेर है ।

 नागौर से जयपुर की दूरी कितनी है  ?
नागौर से जयपुर की दूरी 353 किलोमीटेर है ।

 नागौर से दिल्ली की दूरी कितनी है  ?
नागौर से दिल्ली की दूरी 439 किलोमीटर है ।

 नागौर की प्रसिद्ध जगह कौनसी है  ?
नागौर की प्रसिद्ध जगह  तरकीन दरगाह है ।

 नागौर क्यों प्रसिद्ध है  ?
नागौर विशेष रूप में हर वर्ष लगने वाले पशु मेले के लिए अधिक प्रसिद्ध है।

नागौर की स्थापना कब ओर किसने की ?
नागौर की स्थपना चौहान शाषक सोमेश्वर के सामंत कैमास को कहा जाता है,और किले की नींव 1154 ई. में रखी गयी।

नागौर का पुराना नाम क्या है  ?
नागौर का पुराना नाम अहिछत्रपुर है , जिसका उल्लेख महाभारत मे  मिलता है ।

 नागौर का क्षेत्रफल कितना है  ?
नागौर राजस्थान का पाँचवाँ सबसे बड़ा जिला है, ओर इसका विशाल भूभाग 17,718 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

 नागौर मे कुल कितने गाव है  ?
नागौर मे कुल 1624  गाव है ।

निष्कर्ष

राजस्थान के राज्य नागौर के ज़िले में स्थित एक पूराऐतिहासिक नगर है, नगोर अपने धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध शहर ज़िले का मुख्यालय है। नागौर जिला 25°26\’ और 26°41\’ उत्तरी अक्षांश और 72°11\’ और 74°16\’ पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। नागौर भौगोलिक विस्तार मैदान, पहाड़ियों, रेत के टीलों का एक अच्छा संयोजन है और इस तरह यह महान भारतीय थार रेगिस्तान का एक हिस्सा है।नागौर का वर्तमान जिला राजस्थान राज्य के केंद्र में एक स्थान पाता है। राज्यों के विलय से पहले, नागौर तत्कालीन जोधपुर राज्य का हिस्सा था, स्वतंत्रता के बाद, नागौर को देश में उस स्थान के रूप में चुने जाने का सम्मान मिला।

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